रविवार, 7 सितंबर 2008

राजनीति के राजकुमार

बाह के राजकुमार की रैली निकली.... आजादी का ६१वा साल और राजकुमार , देहात से आई इस छोटी सी ख़बर पर कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया रही ख़बर काफी कुछ कह रही थी बता रही थी कि हमारी सोच आज भी कितनी गुलाम है स्वीकारते हुए संकोच हो रहा है लेकिन इसने मीडिया की राजशाही की चरणवंदना की प्रवृति को भी सबके सामने रखा कई सवाल भी उठाये पुछा कि लोकतंत्र मैं आम आदमी के हथियार का दावा करने वाला मीडिया किस हद तक इस अलंकरण के योग्य है हालाँकि ये कोई अपवाद ख़बर नहीं थी

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